सोमवार, 17 नवंबर 2014

सैंकड़ो बीमारियों का एक इलाज -प्रातः जल सेवन

आज के इस दौर में, जहाँ हमारे देशवासी छोटी-सी-छोटी तकलीफ के लिए बड़ी ही हाईपावर की दवा-गोलियों का इस्तेमाल कर अपने शरीर में जहर घोलते जा रहे हैं, वहीं हमारे ऋषि-महर्षियों द्वारा अनुभव कर प्रकाश में लाया गया एक अत्यधिक आसान प्रयोग, जिसे अपनाकर प्राचीनकाल से करोड़ो भारतवासी सदैव स्वस्थ व प्रसन्नचित्त रहते हैं. आप भी उसे अपनाएं व सैकड़ो बीमारियों से छुटकारा पायें.

शुक्रवार, 14 नवंबर 2014

30 प्लस के बाद भी जवां रहना है तो ये मत भूलना

30 की उम्र के बाद न केवल व्यक्ति की जिम्मेदारियां बढ़ती है बल्कि इस दौरान उसे स्वास्थ्य समस्याओं होने का भी खतरा काफी बढ़ जाता है। जिससे शरीर अस्वस्थ होने लगता है। इसके पीछे कई कारण हो सकते है, लेकिन फिर भी कुछ तरीको को अपनाकर 30 के बाद भी शरीर को स्वस्थ रखा जा सकता है।
30 के बाद शरीर की देखभाल
उम्र बढ़ने के साथ अच्छे स्वास्थ्य के लिए सबसे जरूरी है नियमित व्यायाम और सही भोजन। इसलिए 30 वर्ष के बाद अपने भोजन के प्रति अधिक सचेत हो जाना चाहिए और शरीर को चुस्त रखने के लिए नियमित व्यायाम भी करना चाहिए।

fitness-tips-after-30 तनाव रहित रहिए
तनाव व्यक्ति के स्वास्थ्य का सबसे बड़ा दुश्मन है। लेकिन न चाहते हुए भी हम अक्सर तनाव से घिरे रहते हैं। और उम्र बढने के साथ-साथ जीवन में आती परेशानियों में तनाव होना तो बहुत आम हो जाता है। तनाव अन्य प्रकार की समस्याओं जैसे उच्च रक्तचाप, निराशा व उदासी को जन्म देता है। इसलिए 30 के बाद अपने शरीर को स्वस्थ रखने के लिए तनावरहित रहने की कोशिश करें। इसके लिए तनावों के बारे में न सोचें, अपने मन को शांत रखने के लिए ऐसे रचनात्मक कार्य करें जो आपको पसन्द हो।


गुरुवार, 13 नवंबर 2014

बाल काले करने और काले बने रहने के देशी नुस्खे


तुरई को काटकर नारियल तेल में उबालें व जब तुरई काली हो जाए, तब उसे छानकर किसी बोतल में भर लें। रोजाना इस तेल को बालों में लगाएं। धीरे-धीरे बाल काले होने लगेंगे।
- तिल का तेल तो बालों के लिए अच्छा होता ही है। साथ ही, इसका सेवन भी बहुत लाभ पहुंचाता है। अगर आप अपने भोजन में तिल को शामिल कर लें तो आपके बाल लंबे समय तक काले और घने बने रहेंगे।
- सिर धोने के लिए शिकाकाई पाउडर या माइल्ड शैम्पू का इस्तेमाल करें।
- एक कप चाय का पानी उबालकर उसमें एक चम्मच नमक मिलाएं। इस मिश्रण को बाल धोने से एक घंटे पहले बालों में लगाएं। बाल काले होने लगेंगे।
2 चम्मच हिना पाउडर, 1 चम्मच दही, 1 चम्मच मेथी, 3 चम्मच कॉफी, 2 चम्मच तुलसी पाउडर, 3 चम्मच पुदीना पेस्ट मिलाकर बालों में लगाएं। तीन घंटे बाद शैम्पू करें। कम उम्र में सफेद हुए बाल फिर काले हो जाएंगे।

Detox and Benefits

Maintain better health, loose weight easier and faster, slow down the ageing process and have less aches and pains.The Ion-Cleanse Process generates a 
stream of positive and negative ions (charged atoms) which attract and attach themselves to oppositely charged toxic particles and draws them out of the body through the skin. Each session takes about 30 minutes.The array goes into the water with the hands feet or body and the power supply delivers a small amount of direct current into the array which causes the metals within it in combination with water and salt to generate positively and negatively charged ions.These are some of the benefits that you will experience from using the Detox Foot Spa. Relax for 30 minutes while your body's natural detoxification process is aided and unwanted impurities are eliminated through the pores in your feet.Stress and poor diet introduces toxins to your body, causing an imbalance in the natural energy

बुधवार, 5 नवंबर 2014

डिटॉक्सीफिकेशन

कैसे कार्य करता है डिटॉक्सीफिकेशन ?
  • शरीर से टॉक्सिन बाहर निकालने के लिए लीवर को प्रोत्साहित करता है।
  • किडनी, आंत और त्वचा से विषैले पदार्थो को बाहर निकालने की प्रक्रिया को तेज करता है।
  • रक्त का परिसंचरण सुधारता है।
  • शरीर को स्वस्थ पोषक तत्वों से दोबारा भर देता है।
  • इस मशीन के प्रयोग से शरीर के अंगो में जमीं टॉक्सिन को गला कर निकाला जाता है जिससे हम अपने को निर्भीक हो कर स्वस्थ महसूस कर सकते है..
  • जैसे हम अपने घर की सफाई करते है, अपने वाहन की रिपेयरिंग करते है बस ठीक उसी तरह इस प्रकिया से मशीन के द्वारा अपने शरीर की सफाई करते है, जिससे हमारे शरीर के ख़राब हुवे अंग, कमजोर अंग सभी मजबूत हो कर हमें खुशियों की अनुभूति करते है ..
  • बहुतो को दवा के उपचार से फ़ायदा न हो कर इस मशीन के प्रयोग से लाभ मिला है |
  • आरामदायक प्रयोग, बिना किसी दवा के इस चमत्कारी मशीन का उपयोग करना ख़ुशी की बात है
  • जिज्ञासा, शंका होने पर पूछने से अच्छा इस मशीन का प्रयोग और स्वयं परिक्षण कर के विश्वास पा सकते है |
  • इस तकनीक के वैज्ञानिक प्रविधि के आधार, तर्कपूर्ण करके अनुमान करने का कष्ट न करे, बस एक पूरा कोर्स करके अनुभव और प्रमाण का विश्वास अनुभव करे |

डीटोक्स है क्या, और क्या है इसकी जरुरत

डीटोक्स है क्या, और क्या है इसकी जरुरत
इस संसार में हर ब्यक्ति बेहतर स्वास्थ और लम्बी आयु प्राप्त करना चाहता है, पर इन्सान की कुछ चाहते होती है, महान लोगो के अनुभवों और सर्वे के अनुसार कुछ सात चाहतो को चुनकर निकाला गया है !
                                                                      

१- लम्बी आयु और बेहतर स्वास्थ,
२- बेहतर आमदनी, ईमानदारी के साथ,
३- मान-सम्मान,
४- देश-विदेश यात्रा,
५- शानदार घर, कार , बच्चो की बेहतर शिक्षा,
६- मानव सेवा और दूसरो को आर्थिक बनाने में मदद करना,
७- आर्थिक सफलता और तनाव-मुक्त जीवन,







पहले हम बात करेंगे अपनी लम्बी आयु और बेहतर स्वास्थ के बारे में,

समस्या :

1960 से 2014 के बीच हमारे देश में क्या हो रहा है?
  1. डॉक्टर्स की संख्या बढ़ रही है,

मंगलवार, 4 नवंबर 2014

डीटोक्स ( Detoxification) है क्या ?

साफ पानी में पैर रखिये
३० मिनट बाद उसी पानी में शरीर के विषाक्त तत्व देखिये
ज़िंदगी को कीजिए 'रीसेट' – Press the Reset Button On Your Life

ज़िंदगी हमें हर समय किसी-न-किसी मोड़ पर उलझाती रहती है. हम अपने तयशुदा रास्ते से भटक जाते हैं और मंजिल आँखों से ओझल हो जाती है. ऐसे में हम हमेशा से यही ख्वाहिश आये है की कि काश मेरे पास ज़िंदगी को नए सिरे से शुरू करने के लिए कोई रीसेट बटन होता जैसा मोबाइल या कम्प्युटर में होता है,
यकीनन, हमारे पास बीते समय में लौटने के लिए कोई टाइम मशीन नहीं है लेकिन कुछ तो ऐसा है जिससे हम

शुक्रवार, 31 अक्तूबर 2014

पंचकर्म है शरीर की अंदरूनी सफाई

पंचकर्म - आयुर्वेदिक पूर्ण मद्यहरण एवं शुद्धिकरण
 
पंचकर्म आयुर्वेद का एक प्रमुख शुद्धिकरण एवं मद्यहरण उपचार है। पंचकर्म का अर्थ पाँच
विभिन्न चिकित्साओं का संमिश्रण है। इस प्रक्रिया का प्रयोग शरीर को बीमारियों एवं कुपोषण द्वारा छोड़े गये विषैले पदार्थों से निर्मल करने के लिये होता है। आयुर्वेद कहता है कि असंतुलित दोष अपशिष्ट पदार्थ उतपन्न करता है जिसे ’अम’ कहा जाता है। यह दुर्गंधयुक्त, चिपचिपा, हानिकारक पदार्थ होता है जिसे शरीर से यथासंभव संपूर्ण रूप से निकालना आवश्यक है। ’अम’ के निर्माण को रोकने के लिये आयुर्वेदिक साहित्य व्यक्ति को उचित आहार देने के साथ उपयुक्त जीवन शैली, आदतें तथा व्यायाम पर रखने, तथा पंचकर्म जैसे एक उचित निर्मलीकरण कार्यक्रम को लागू करने की सलाह देते हैं। 

पंचकर्म

शिरोधारा में सिर के ऊपर तेल की एक पतली धारा निरन्तर बहायी जाती है।
पंचकर्म (अर्थात पाँच कर्म) आयुर्वेद की उत्‍कृष्‍ट चिकित्‍सा विधि है। पंचकर्म को आयुर्वेद की विशिष्‍ट चिकित्‍सा पद्धति कहते है। इस विधि से शरीर में होंनें वाले रोगों और रोग के कारणों को दूर करनें के लिये और तीनों दोषों (अर्थात त्रिदोष) वात, पित्‍त, कफ के असम रूप को समरूप में पुनः स्‍थापित करनें के लिये विभिन्‍न प्रकार की प्रक्रियायें प्रयोग मे लाई जाती हैं। लेकिन इन कई प्रक्रियायों में पांच कर्म मुख्‍य हैं, इसीलिये ‘’पंचकर्म’’ कहते

    वमन  
    विरेचन
    बस्ति – अनुवासन
    बस्ति – आस्‍थापन
    नस्‍य

 उपरोक्‍त पांच को मुख्‍य अथवा प्रधान कर्म कहते हैं।

परिचय
आयुर्वेद पंचकर्म चिकित्सा पद्धति देश की प्राचीनतम चिकित्सा पद्धतियों में से एक है। देश के दक्षिणी भाग में यह बहुत लोकप्रिय है और सामान्यतौर पर लोक जीवन में स्वीकार्य है। उत्तर भारत में यह पद्धति हाल ही में

शुक्रवार, 12 सितंबर 2014

What is an Ion Foot Detox Machine

Our feet have over 4,000 pores. The pores are the outlet the Ion Detox Spa or ionic Foot Bath uses to clear the toxins from inside our cells. During a 30 minute session the water turns all kinds of colors. Some claim that the water turning colors and all the debris in the water is coming out of the body. This is a misconception and has led to many critics calling the ionic foot bath a hoax. The information in this article will help the seller, the user, and the critic to understand what really happens when a foot detox is performed.


Who invented the Ion foot detox machine?
It all started with a man by the name of Royal Rife. Although he had never seen one of these modern Electro-Therapy devices, he was the first to use frequencies in the fight against viruses, cancer and other ailments.

शुक्रवार, 5 सितंबर 2014

डिटॉक्स

डिटॉक्स शब्द का अर्थ है शरीर के आंतरिक तंत्र को भोजन में मौजूद विषैले और दूसरे हानिकारक रसायनों से मुक्त करना। इसलिए बहुत जरूरी है कि हम अपने शरीर को महीने में एक बार तीन से पांच दिन के लिए डिटॉक्सीफाई करें। डिटॉक्स या डिटॉक्सीफिकेशन डाइट काफी लोकप्रिय है, लेकिन यह वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित नहीं है। 

वैसे आयुर्वेद और चायनीज मेडिसिन सिस्टम और संसार की कई संस्कृतियों में सदियों से इनका प्रचलन है- आराम करो, सफाई करो और अपने शरीर का पोषण करो। अपने शरीर से विषैले पदार्थों को निकालने के बाद, उसे पोषक भोजन खिलाएं। डिटॉक्सीफिकेशन आपको बीमारियों से बचाता है और आपके स्वास्थ्य को बनाए रखने की क्षमता को पुनर्जीवित करता है। शरीर के हीलिंग सिस्टम को डिटॉक्सीफिकेशन बेहतर बनाता है।

डाइट प्लान सबसे पहले तो टॉक्सिन का सेवन कम करें। अल्कोहल, कॉफी, सिगरेट, रिफाइंड शूगर और सैचुरेटेड फैट, ये सब शरीर में टॉक्सिन का कार्य करते हैं और शरीर की कार्यप्रणाली में बाधा डालते हैं। 

एक अच्छी डिटॉक्स डाइट में 60 प्रतिशत तरल और 40 प्रतिशत ठोस खाद्य पदार्थ होना चाहिए।डिटॉक्सीफिकेशन का पहला नियम है अपने शरीर को हाइड्रेड रखें।
जूस: ढेर सारे फलों जैसे तरबूज, पपीता और खीरे का जूस पिएं, लेकिन अंगूर का रस न पिएं, क्योंकि यह डिटॉक्स प्रणाली में रुकावट पैदा करता है। 

सब्जियां: गहरी हरी पत्तेदार सब्जियों, फूलगोभी, पत्तागोभी और ब्रोकली को भोजन में प्रमुखता से शामिल करें। इनके अलावा प्याज भी एक अच्छा क्लीनजिंग एजेंट है। शलजम लीवर को डिटॉक्स करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। बीज में फ्लैक्स, सीसैम, सनफ्लावर और कद्दू काफी फायदेमंद हैं। फलों में पपीता और पाइन एप्पल क्लीनजिंग के लिए बहुत अच्छे हैं। 

कैसे और कब आदर्श रूप से किसी को तीन महीने में एक बार एक सप्ताह के लिए डिटॉक्स डाइट पर रहना चाहिए। अगर आप मोटे हैं तो हर वीकएंड पर डिटॉक्स कर सकते हैं। अगर आपके शरीर में कोलेस्ट्रॉल की मात्रा अधिक है, डायबिटीज या ब्लड प्रेशर है तो हर दो महीने में डिटॉक्स करें। अगर आप तनावभरी जिंदगी जी रहे हैं तो 15 दिन में एक बार डिटॉक्स जरूर करें। जब आप डिटॉक्स करें तो कैफीन, ऐसे खाद्य पदार्थ जिनमें प्रिजर्वेटिव हो, चीनी और वसा युक्त जंक फूड का सेवन न करें। स्मोकिंग और शराब का सेवन भी न करें। लंबे समय तक डिटॉक्स डाइट पर न रहें, क्योंकि इससे शरीर में विटामिन और मिनरल की कमी हो जाती है। इससे डीहाइड्रेशन भी हो सकता है। 

कैसे जानें कि शरीर में विषैले तत्व जमा हो गए हैं आधुनिक जीवनशैली, शहरी परिवेश की दौड़भाग और बढ़ते पर्यावरण प्रदूषण ने लोगों के स्वास्थ्य को बुरी तरह प्रभावित किया है और हमारे शरीर में टॉक्सिन की मौजूदगी को बढ़ा दिया है। कुछ लक्षण हैं जिन पर नजर रख कर आप पहचान सकते हैं कि आपको डिटॉक्सीफिकेशन की जरूरत है। 

थकान और कमजोरी महसूस होना। हार्मोन संबंधी समस्या (मूड स्विंग)। ध्यान केंद्रन की समस्या। सिरदर्द और बदन दर्द। त्वचा संबंधी समस्याएं। पाचन तंत्र संबंधी समस्याएं। भार कम करने में समस्या होना। कैसे कार्य करता है डिटॉक्सीफिकेशन उपवास के द्वारा शरीर के अंगों को आराम पहुंचाता है। शरीर से टॉक्सिन बाहर निकालने के लिए लीवर को प्रोत्साहित करता है। किडनी, आंत और त्वचा से विषैले पदार्थो को बाहर निकालने की प्रक्रिया को तेज करता है। रक्त का परिसंचरण सुधारता है। शरीर को स्वस्थ पोषक तत्वों से दोबारा भर देता है। 

डिटॉक्सीफिकेशन 10 टिप्स 
ढेर सारा फाइबर खाएं, जिसमें ब्राउन राइस, ताजे फल और सब्जियां, चुकंदर, मूली, पत्तागोभी, ब्रोकली शामिल हों। ये डिटॉक्सीफिकेशन के बहुत अच्छे स्त्रोत हैं। अपने लीवर को हर्बल टी या ग्रीन टी के द्वारा भी साफ कर सकते हैं। विटामिन सी का अधिक मात्रा में सेवन करें, जो लीवर से टॉक्सिन को बाहर निकालने में मददगार होते हैं। दिन में कम से कम चार लीटर पानी पिएं। गहरी सांस लें, ताकि अधिक मात्रा में ऑक्सीजन शरीर में प्रवाहित हो। सोना बाथ लें, ताकि पसीने के साथ व्यर्थ पदार्थ शरीर से बाहर निकल सकें। बेहतर नींद, सकारात्मक दृष्टिकोण, मस्तिष्क की स्पष्टता बनाए रखें। असंतुलित भोजन, नकारात्मक मानसिक दृष्टिकोण और शारीरिक निष्क्रियता से शरीर में टॉक्सिन इकट्ठा होने लगते हैं। इन सबसे बचने का प्रयास करें। शाकाहारी भोजन लें। यह शरीर पर अधिक दबाव नहीं डालता। जो लोग नियमित रूप से कैफीन या सोडा ड्रिंक लेते हैं, उनके शरीर में भी टॉक्सिन इकट्ठे हो जाते हैं। इनका सेवन बंद कर दें या बिल्कुल कम कर दें। कैफीन का सेवन बंद करने से होने वाले सिरदर्द से निपटने के लिए अधिक मात्रा में विटामिन बी 5 का सेवन कर सकते हैं। गर्म पानी में आधा नींबू निचोड़ कर पिएं। नींबू-पानी इस काम में बेहद फायदेमंद है। लेकिन यह ध्यान रखें कि इसमें कभी नमक या चीनी न मिलाएं। त्रिफला भी एक अच्छा विकल्प है। हल्के गर्म पानी में आधा चम्मच त्रिफला मिलाएं। आधा घुलने तक चम्मच से हिलाते रहें। छलनी से छान कर इसे पी लें। एलोवेरा जूस शरीर से जहरीली चीजों को निकालने के लिए एक बेहतरीन साधन है। दो चम्मच एलोवेरा जूस को एक कप पानी में मिलाएं और दिन में दो बार पिएं। डिटॉक्स डाइट के लाभ इम्यूनिटी को सुधारता है और ऊर्जा के स्तर को बढ़ाता है। पाचन मार्ग की सफाई करता है। रक्त को शुद्घ करता है। त्वचा को चमकदार बनाए रखता है। उत्तकों को नष्ट करने वाले फ्री रैडिकल्स को शरीर से बाहर निकालता है। कैंसर और दूसरी बीमारियों के खतरे को कम करता है। रक्त को शुद्घ करता है। लीवर और किडनी की कार्यप्रणाली को सुधारता है। बुरी आदतों जैसे प्रोसेस्ड फूड, शूगर, कैफीन और शराब के सेवन पर नियंत्रण हो जाता है। इन बातों को नजरअंदाज न करें गर्भवती महिलाएं, स्तनपान कराने वाली महिलाएं और जिन्हें थायराइड, लीवर और किडनी की समस्या हो, डिटॉक्स डाइट पर न जाएं। जिन लोगों ने अंग प्रत्यारोपण करवाया हो, वह डिटॉक्स डाइट न लें। बुजुर्गों और बच्चों को भी इससे दूर रहने की सलाह दी जाती है। जो लोग मल्टीविटामिन का सेवन कर रहे हैं, उन्हें डिटॉक्स के दौरान इनका सेवन बंद कर देना चाहिए। डायबिटीज, हाइपरटेंशन, थायराइड और हृदय की समस्याओं के रोगी डिटॉक्स के साथ इन दवाओं का सेवन जारी रख सकते हैं। बरतें सावधानी किसी को भी डिटॉक्स डाइट किसी विशेषज्ञ न्युट्रीशिनिस्ट के मार्गदर्शन में ही करना चाहिए और कुछ बातों का पालन करना चाहिए। जब आप डिटॉक्स डाइट पर जाएं, आपको खुद को भूखा नहीं रखना चाहिए। मौसमी, ताजे फल और सब्जियों, जूस, नींबू पानी, नारियल पानी, दही, छाछ, अंकुरित अनाज, साबुत अनाज का सेवन करें। ढेर सारा पानी पिएं।

डिटॉक्स करते समय : 
१. मशीन प्रयोग करते समय मोबाइल ऑफ रखे..तथा कोई भी विधुतीय उपकरण साथ न रखे.. 
२. मशीन प्रयोग करते समय ३० मिनट तक तब में पैर न हिलाये.. 
३. भर पेट खाना खाने के १ घंटे पश्चात ही मशीन प्रयोग करे... 

नोट : ५० साल के ऊपर के ब्यक्ति के लिए... ३ या ४ दिन के अंतराल पर डिटॉक्स कराये... पानी अधिक से अधिक पिए.. ग्रीन टी के मिश्रण के साथ... अगर घुटने में दर्द महसूस हो तो बी सी यम मशीन पर पैर का और कमर के प्रेसर का मसाज करे.. डिटॉक्स करते समय कुछ लक्छण : 

१. शरीर में कही दर्द है.. तो दर्द बड़ सकता है.. या जलन हो सकता है... 
२. बुखार आना, सर दुखना, या सर्दी लगने जैसी कोई तकलीफ 
३. किसी समय ज्यादा पैखाना, या ज्यादा पिसाब लग सकता है.. 
४. किसी को थकान, अधिक नींद , या अधिक प्यास भी लगता है.. बस अधिक से अधिक ग्रीन टी और नीबू पानी का सेवन करे...

"बिना खर्च किये ही रोगों से बचकर तन्दुरुस्त बनो"

"बिना खर्च किये ही रोगों से बचकर तन्दुरुस्त बनो"

नई एवं पुरानी प्राणघातक बीमारियाँ दूर करने के लिए यह एक अत्यंत सरल एवं बहुत बढ़िया प्रयोग है। इसको हम यहाँ पानी प्रयोग कहेंगे।

मधुप्रमेह (डायबिटीज), सिरदर्द, ब्लडप्रेशर, एनिमिया (रक्त की कमी), जोड़ों का दर्द, लकवा (पेरेलिसिस), मोटापन, हृदय की धड़कनें एवं बेहोशी, कफ, खाँसी, दमा (ब्रोन्काईटीस), टी.बी., मेनिनजाईटीस), लीवर के रोग, पेशाब की बीमारियाँ, एसीडीटी (अम्लपित्त), गेस्ट्राईटीस (गैस विषयक तकलीफें), पेचिश, कब्ज, हरस, आँखों की हर किस्म की तकलीफें, स्त्रियों का अनियमित मासिकस्राव, प्रदर (ल्यकोरिया), गर्भाशय का कैंसर, नाक, कान एवं गले से सम्बन्धित रोग आदि आदि।


पानी पीने की रीतिः प्रभात काल में जल्दी उठकर, बिना मुँह धोये हुए बिना ब्रश किये हुए करीब सवा लीटर (चार बड़े गिलास) पानी एक साथ पी लें। ताजा पानी आराम से बैठ कर धीरे धीरे पीए और पानी ठण्डा न हो। तदनन्तर 45 मिनट तक कुछ भी खायें-पियें नहीं। पानी पीने के बाद मुँह धो सकते हैं, ब्रश कर सकते हैं। यह प्रयोग चालू करने के बाद सुबह में अल्पाहार के बाद, दोपहर को एवं रात्रि को भोजन के बाद दो घण्टे बीत जाने पर पानी पियें। रात्रि के समय सोने से पहले कुछ भी खाये नहीं।

बीमार एवं बहुत ही नाजुक प्रकृति के लोग एक साथ चार गिलास पानी नहीं पी सकें तो वे पहले एक या दो गिलास से प्रारंभ करें और बाद में धीरे-धीरे एक-एक गिलास बढ़ाकर चार गिलास पर आ जायें। फिर नियमित रूप से चार गिलास पीते रहें।

बीमार हो या तन्दुरुस्त, यह प्रयोग सबके लिए इस्तेमाल करने योग्य है। बीमार के लिए यह प्रयोग इसलिए उपयोगी है कि इससे उसे आरोग्यता मिलेगी और तन्दुरुस्त आदमी यह प्रयोग करेगा तो वह कभी बीमार नहीं पड़ेगा।

जो लोग वायु रोग एवं जोड़ों के दर्द से पीड़ित हों उन्हें यह प्रयोग एक सप्ताह तक दिन में तीन बार करना चाहिए। एक सप्ताह के बाद दिन में एक बार करना पर्याप्त है। यह पानी प्रयोग बिल्कुल सरल एवं सादा है। इसमें एक भी पैसे का खर्च नहीं है। हमारे देश के गरीब लोगों के लिए बिना खर्च एवं बिना दवाई के आरोग्यता प्राप्त करने की यह एक चमत्कारिक रीति है।

तमाम भाइयों एवं बहनों को विनती है कि इस पानी प्रयोग का हो सके उतना अधिक प्रचार करें। रोगियों के रोग दूर करने के प्रयासों में सहयोगी बनें।
चार गिलास पानी पीने से स्वास्थ्य पर कोई भी कुप्रभाव नहीं पड़ता। हाँ, प्रारंभ के तीन-चार दिन तक पानी पीने के बाद दो-तीन बार पेशाब होगा लेकिन तीन-चार दिन के बाद पेशाब नियमित हो जायेगा।

..... तो भाइयों एवं बहनों ! तन्दुरुस्त होने के लिए एवं अपनी तन्दुरुस्ती बनाये रखने के लिए आज से ही यह पानी प्रयोग शुरु करके बीमारियों को भगायें। आज से हम सब तन्दुरुस्त बनकर जीवन में दया, मानवता एवं ईमानदारी लाकर पृथ्वी पर स्वर्ग को उतारेंगे....

प्रातःकाल में दातुन करने से पहले पानी पीने से कई रोग मिट जाते हैं ऐसा हम लोगों ने अपने बुजुर्गों से कहानी के रूप में सुना है किन्तु अब हमारे देश के बुजुर्गों की बातों का प्रचार-प्रसार विदेशी लोगों के द्वारा किया जाता है तब हमें पता चलता है कि कैसा महान् है भारत का शरीरविज्ञान और अध्यात्म ज्ञान !


तिथि अनुसार आहार-विहार

तिथि अनुसार आहार-विहार ---

प्रतिपदा को कूष्मांड (कुम्हड़ा, पेठा) न खायें, क्योंकि यह धन का नाश करने वाला है।
द्विताया को बृहती (छोटा बैंगन या कटेहरी) खाना निषिद्ध है|

तृतिया को परवल खाने से शत्रुओं की वृद्धि होती है।

चतुर्थी को मूली खाने से धन का नाश होता है।

पंचमी को बेल खाने से कलंक लगता है।

षष्ठी को नीम की पत्ती, फल या दातुन मुँह में डालने से नीच योनियों की प्राप्ति होती है।

सप्तमी को ताड़ का फल खाने से रोग होते हैं तथा शरीर का नाश होता है।

अष्टमी को नारियल का फल खाने से बुद्धि का नाश होता है।

नवमी को लौकी गोमांस के समान त्याज्य है।

एकादशी को शिम्बी(सेम) खाने से, द्वादशी को पूतिका(पोई) खाने से अथवा त्रयोदशी को बैंगन खाने से पुत्र का नाश होता है।

अमावस्या, पूर्णिमा, संक्रान्ति, चतुर्दशी और अष्टमी तिथि, रविवार, श्राद्ध और व्रत के दिन स्त्री-सहवास तथा तिल का तेल, लाल रंग का साग व काँसे के पात्र में भोजन करना निषिद्ध है।

आयुर्वेदिक चूर्ण

हम इससे पहले आयुर्वेदिक दवाओं में गोलियों, वटियों भस्म व पिष्टी की जानकारी आपको दे चुके हैं। आयुर्वेद के कुछ चूर्ण, जो दैनिक जीवन में बहुत उपयोगी हैं, की जानकारी दी जा रही है-

अश्वगन्धादि चूर्ण : धातु पौष्टिक, नेत्रों की कमजोरी, प्रमेह, शक्तिवर्द्धक, वीर्य वर्द्धक, पौष्टिक तथा बाजीकर, शरीर की झुर्रियों को दूर करता है। मात्रा 5 से 10 ग्राम प्रातः व सायं दूध के साथ।

अविपित्तकर चूर्ण : अम्लपित्त की सर्वोत्तम दवा। छाती और गले की जलन, खट्टी डकारें, कब्जियत आदि पित्त रोगों के सभी उपद्रव इसमें शांत होते हैं। मात्रा 3 से 6 ग्राम भोजन के साथ।

अष्टांग लवण चूर्ण : स्वादिष्ट तथा रुचिवर्द्धक। मंदाग्नि, अरुचि, भूख न लगना आदि पर विशेष लाभकारी। मात्रा 3 से 5 ग्राम भोजन के पश्चात या पूर्व। थोड़ा-थोड़ा खाना चाहिए।

आमलकी रसायन चूर्ण : पौष्टिक, पित्त नाशक व रसायन है। नियमित सेवन से शरीर व इन्द्रियां दृढ़ होती हैं। मात्रा 3 ग्राम प्रातः व सायं दूध के साथ।

आमलक्यादि चूर्ण : सभी ज्वरों में उपयोगी, दस्तावर, अग्निवर्द्धक, रुचिकर एवं पाचक। मात्रा 1 से 3 गोली सुबह व शाम पानी से।

एलादि चूर्ण : उल्टी होना, हाथ, पांव और आंखों में जलन होना, अरुचि व मंदाग्नि में लाभदायक तथा प्यास नाशक है। मात्रा 1 से 3 ग्राम शहद से।

गंगाधर (वृहत) चूर्ण : अतिसार, पतले दस्त, संग्रहणी, पेचिश के दस्त आदि में। मात्रा 1 से 3 ग्राम चावल का पानी या शहद से दिन में तीन बार।

जातिफलादि चूर्ण : अतिसार, संग्रहणी, पेट में मरोड़, अरुचि, अपचन, मंदाग्नि, वात-कफ तथा सर्दी (जुकाम) को नष्ट करता है। मात्रा 1.5 से 3 ग्राम शहद से।

दाडिमाष्टक चूर्ण : स्वादिष्ट एवं रुचिवर्द्धक। अजीर्ण, अग्निमांद्य, अरुचि गुल्म, संग्रहणी, व गले के रोगों में। मात्रा 3 से 5 ग्राम भोजन के बाद।

चातुर्जात चूर्ण : अग्निवर्द्धक, दीपक, पाचक एवं विषनाशक। मात्रा 1/2 से 1 ग्राम दिन में तीन बार शहद से।

चातुर्भद्र चूर्ण : बालकों के सामान्य रोग, ज्वर, अपचन, उल्टी, अग्निमांद्य आदि पर गुणकारी। मात्रा 1 से 4 रत्ती दिन में तीन बार शहद से।

चोपचिन्यादि चूर्ण : उपदंश, प्रमेह, वातव्याधि, व्रण आदि पर। मात्रा 1 से 3 ग्राम प्रातः व सायं जल अथवा शहद से।

तालीसादि चूर्ण : जीर्ण, ज्वर, श्वास, खांसी, वमन, पांडू, तिल्ली, अरुचि, आफरा, अतिसार, संग्रहणी आदि विकारों में लाभकारी। मात्रा 3 से 5 ग्राम शहद के साथ सुबह-शाम।

दशन संस्कार चूर्ण : दांत और मुंह के रोगों को नष्ट करता है। मंजन करना चाहिए।

नारायण चूर्ण : उदर रोग, अफरा, गुल्म, सूजन, कब्जियत, मंदाग्नि, बवासीर आदि रोगों में तथा पेट साफ करने के लिए उपयोगी। मात्रा 2 से 4 ग्राम गर्म जल से।

पुष्यानुग चूर्ण : स्त्रियों के प्रदर रोग की उत्तम दवा। सभी प्रकार के प्रदर, योनी रोग, रक्तातिसार, रजोदोष, बवासीर आदि में लाभकारी। मात्रा 2 से 3 ग्राम सुबह-शाम शहद अथवा चावल के पानी में।

पुष्पावरोधग्न चूर्ण : स्त्रियों को मासिक धर्म न होना या कष्ट होना तथा रुके हुए मासिक धर्म को खोलता है। मात्रा 6 से 12 ग्राम दिन में तीन समय गर्म जल के साथ।

पंचकोल चूर्ण : अरुचि, अफरा, शूल, गुल्म रोग आदि में। अग्निवर्द्धक व दीपन पाचन। मात्रा 1 से 3 ग्राम।

पंचसम चूर्ण : कब्जियत को दूर कर पेट को साफ करता है तथा पाचन शक्ति और भूख बढ़ाता है। आम शूल व उदर शूल नाशक है। हल्का दस्तावर है। आम वृद्धि, अतिसार, अजीर्ण, अफरा, आदि नाशक है। मात्रा 5 से 10 ग्राम सोते समय पानी से।

यवानिखांडव चूर्ण : रोचक, पाचक व स्वादिष्ट। अरुचि, मंदाग्नि, वमन, अतिसार, संग्रहणी आदि उदर रोगों पर गुणकारी। मात्रा 3 से 6 ग्राम।

लवणभास्कर चूर्ण : यह स्वादिष्ट व पाचक है तथा आमाशय शोधक है। अजीर्ण, अरुचि, पेट के रोग, मंदाग्नि, खट्टी डकार आना, भूख कम लगना। आदि अनेक रोगों में लाभकारी। कब्जियत मिटाता है और पतले दस्तों को बंद करता है। बवासीर, सूजन, शूल, श्वास, आमवात आदि में उपयोगी। मात्रा 3 से 6 ग्राम मठा (छाछ) या पानी से भोजन के पूर्व या पश्चात लें।

लवांगादि चूर्ण : वात, पित्त व कफ नाशक, कंठ रोग, वमन, अग्निमांद्य, अरुचि में लाभदायक। स्त्रियों को गर्भावस्था में होने वाले विकार, जैसे जी मिचलाना, उल्टी, अरुचि आदि में फायदा करता है। हृदय रोग, खांसी, हिचकी, पीनस, अतिसार, श्वास, प्रमेह, संग्रहणी, आदि में लाभदायक। मात्रा 3 ग्राम सुबह-शाम शहद से।

व्योषादि चूर्ण : श्वास, खांसी, जुकाम, नजला, पीनस में लाभदायक तथा आवाज साफ करता है। मात्रा 3 से 5 ग्राम सायंकाल गुनगुने पानी से।

शतावरी चूर्ण : धातु क्षीणता, स्वप्न दोष व वीर्यविकार में, रस रक्त आदि सात धातुओं की वृद्धि होती है। शक्ति वर्द्धक, पौष्टिक, बाजीकर तथा वीर्य वर्द्धक है। मात्रा 5 ग्राम प्रातः व सायं दूध के साथ।

स्वादिष्ट विरेचन चूर्ण (सुख विरेचन चूर्ण) : हल्का दस्तावर है। बिना कतलीफ के पेट साफ करता है। खून साफ करता है तथा नियमित व्यवहार से बवासीर में लाभकारी। मात्रा 3 से 6 ग्राम रात्रि सोते समय गर्म जल अथवा दूध से।

सारस्वत चूर्ण : दिमाग के दोषों को दूर करता है। बुद्धि व स्मृति बढ़ाता है। अनिद्रा या कम निद्रा में लाभदायक। विद्यार्थियों एवं दिमागी काम करने वालों के लिए उत्तम। मात्रा 1 से 3 ग्राम प्रातः -सायं मधु या दूध से।

सितोपलादि चूर्ण : पुराना बुखार, भूख न लगना, श्वास, खांसी, शारीरिक क्षीणता, अरुचि जीभ की शून्यता, हाथ-पैर की जलन, नाक व मुंह से खून आना, क्षय आदि रोगों की प्रसिद्ध दवा। मात्रा 1 से 3 गोली सुबह-शाम शहाद से।

सुदर्शन (महा) चूर्ण : सब तरह का बुखार, इकतरा, दुजारी, तिजारी, मलेरिया, जीर्ण ज्वर, यकृत व प्लीहा के दोष से उत्पन्न होने वाले जीर्ण ज्वर, धातुगत ज्वर आदि में विशेष लाभकारी। कलेजे की जलन, प्यास, खांसी तथा पीठ, कमर, जांघ व पसवाडे के दर्द को दूर करता है। मात्रा 3 से 5 ग्राम सुबह-शाम पानी के साथ।

सुलेमानी नमक चूर्ण : भूख बढ़ाता है और खाना हजम होता है। पेट का दर्द, जी मिचलाना, खट्टी डकार का आना, दस्त साफ न आना आदि अनेक प्रकार के रोग नष्ट करता है। पेट की वायु शुद्ध करता है। मात्रा 3 से 5 ग्राम घी में मिलाकर भोजन के पहले अथवा सुबह-शाम गर्म जल से भोजन के बाद।

सैंधवादि चूर्ण : अग्निवर्द्धक, दीपन व पाचन। मात्रा 2 से 3 ग्राम प्रातः व सायंकाल पानी अथवा छाछ से।

हिंग्वाष्टक चूर्ण : पेट की वायु को साफ करता है तथा अग्निवर्द्धक व पाचक है। अजीर्ण, मरोड़, ऐंठन, पेट में गुड़गुड़ाहट, पेट का फूलना, पेट का दर्द, भूख न लगना, वायु रुकना, दस्त साफ न होना, अपच के दस्त आदि में पेट के रोग नष्ट होते हैं तथा पाचन शक्ति ठीक काम करती है। मात्रा 3 से 5 ग्राम घी में मिलाकर भोजन के पहले अथवा सुबह-शाम गर्म जल से भोजन के बाद।

त्रिकटु चूर्ण : खांसी, कफ, वायु, शूल नाशक, व अग्निदीपक। मात्रा 1/2 से 1 ग्राम प्रातः-सायंकाल शहद से।

त्रिफला चूर्ण : कब्ज, पांडू, कामला, सूजन, रक्त विकार, नेत्रविकार आदि रोगों को दूर करता है तथा रसायन है। पुरानी कब्जियत दूर करता है। इसके पानी से आंखें धोने से नेत्र ज्योति बढ़ती है। मात्रा 1 से 3 ग्राम घी व शहद से तथा कब्जियत के लिए 5 से 10 ग्राम रात्रि को जल के साथ।

श्रृंग्यादि चूर्ण : बालकों के श्वास, खांसी, अतिसार, ज्वर में। मात्रा 2 से 4 रत्ती प्रातः-सायंकाल शहद से।

अजमोदादि चूर्ण : जोड़ों का दुःखना, सूजन, अतिसार, आमवात, कमर, पीठ का दर्द व वात व्याधि नाशक व अग्निदीपक। मात्रा 3 से 5 ग्राम प्रातः-सायं गर्म जल से अथवा रास्नादि काढ़े से।

अग्निमुख चूर्ण (निर्लवण) : उदावर्त, अजीर्ण, उदर रोग, शूल, गुल्म व श्वास में लाभप्रद। अग्निदीपक तथा पाचक। मात्रा 3 ग्राम प्रातः-सायं उष्ण जल से।

माजून मुलैयन : हाजमा करके दस्त साफ लाने के लिए प्रसिद्ध माजून है। बवासीर के मरीजों के लिए श्रेष्ठ दस्तावर दवा। मात्रा रात को सोते समय 10 ग्राम माजून दूध के साथ।

SASKVNS

ज़िंदगी को कीजिए

'रीसेट' – Press the Reset Button On Your Life
ज़िंदगी हमें हर समय किसी-न-किसी मोड़ पर उलझाती रहती है. हम अपने तयशुदा रास्ते से भटक जाते हैं और मंजिल आँखों से ओझल हो जाती है. ऐसे में मैं हमेशा से यही ख्वाहिश करता आया हूँ कि काश मेरे पास ज़िंदगी को नए सिरे से शुरू करने के लिए कोई रीसेट बटन होता जैसा मोबाइल या कम्प्युटर में होता हैहमारे पास बीते समय में लौटने के लिए कोई टाइम मशीन नहीं है लेकिन कुछ तो ऐसा है जिससे हम अपने जीवन को रीसेट या रीबूट कर सकते हैं एक ही मशीन सभी रोगो के तत्व का पता लगता है और उसे आप के आँख के सामने ही निकल देता है

कोई एलोपैथिक होमियोपैथिक आयुर्वेदिक दवा नहीं

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aok ion cleanse

अमेरिकन टेक्नोलॉजी १०० % सुरक्षित आसान और विश्वसनीय तरीका किसी साइड एफ्फेट का डर नहीं संका दुःख टेंसन भी दूर हमारी सेवाएं :-
 a. Detoxification 
 b. BCM Machine 


डिटॉक्सीफिकेशन शरीर को सेहतमंद रखने के लिए डाइट कंट्रोल, पर्याप्त पानी, आराम और ताजा हवा आवश्यक है। इसमें फिजिकल, मानसिक और इमोशनल फैक्टर काम करते हैं। इसके लिए जरूरी है डिटॉक्सीफिकेशन। यह आपके शरीर के लिए बसंत के मौसम में घर की सफाई जैसा ही है। यानी शरीर को चुस्त-दुरूस्त और तरो-ताजा रखने की प्रक्रिया है। जब आप मानसिक तनाव और शरीर के विकारों से मुक्त हो जाते हैं, तो शरीर में ऊर्जा का संचार हो जाता है। अनहेल्दी डाइट, कब्ज, तनाव, दूषित पानी पीने, वातावरण में मौजूद दूषित तत्व श्वास के साथ शरीर में पहुंचने और चाय, कॉफी या अल्कोहल का अधिक सेवन करने से शरीर में विषाक्त तत्वों का स्तर बढ़ने लगता है। ऐसे में शरीर का डिटॉक्सीफिकेशन यानी विष दूर करना बहुत जरूरी होता है। रक्त शुद्धिकरण : शरीर में विषाक्त तत्वों का स्तर बढ़ने से शारीरिक-तंत्र गड़बड़ाने लगता है। ऐसी स्थिति में डिटॉक्सीफिकेशन रक्त के शुद्धिकरण और अंदरूनी अंगों की कार्यप्रणाली को सुचारू रूप से जारी रखने के डिटॉक्सीफिकेशन के फायदे -:


- त्वचा की रंगत में निखार
- बेहतर तंत्रिका तंत्र
- पाचन तंत्र में सुधार
- शारीरिक ऊर्जा में बढ़ोतरी
- मेटाबॉलिज्म के फंक्शन में सुधार

Ion cleansing foot detox therapy




Did you know that for the human body to be optimum healths it should have 80% negative ions and 20% positive ions and that the human body is designed to eliminate toxins? due to air pollution, food pollution, water pollution.
All living things have been contraminated with toxins and hazardous chemical.
When exposed to toxins, the human defense system is weakend leading to numerous diseases.
Symptoms of toxicity in the body may result to Headeche, Allergy, Acne, Obesity, Constipation, Arthritis, Digestive problem, Bad breath, High bllod pressure, Heart problem, Diabetes, Cancer.
 
Why we suffer
Get rid of toxins
 
Now
Detoxifying your self through feet !
Ion cleansing foot detox therapy.
It's safe solution to detoxify your body with
Less Effort
Less Money
          &
Strong immune system.

It is very helpful for Reduction of wrinkles, acne and other skin problems.
Also increasing energy and relieving stress, boosting sexual health, removing pain and reducing inflammation and more......
How Does it Work ?

While immersing your feet in the foot bowl, Ion cleansing foot detox machine produce high concentration of negative ions through the process of electrolysis.
These ions are absorbed through the epidermis via osmosis. Once they have entered the body, the ions acts as cellular fuel to balance Ph level in the body and enhance Cellular Conductvity.
Thus enabling the body to naturally detoxyfy itself.

What does water change the colour ?

This happens due to substances present in the water (salt, chlorine etc.) plus bacteria, dead cells in the skin, result to colour change.
For those people who are beetween 10-60 yrs old--they require 15 therapy every alternet day.
For people with chronic conditions they may detox continously without a break for an indefinite period or as needed.
 
Benefits of Detoxification-

Increased Energy Levels.
Alleviates Constipation
Reduce Water Retention
Better Memory Retention
Boost Immune System
Relieves Allergies ( e.g. Hay Fever, Asthma)
Relieves Joints Pain ( e.g. Arthritis )
Improved liver & Kidney fuction
Reduce Wrinkles, Acne and other skin problems.
Help speed up the metabolism to help in weight reduction.
Normalizes blood pressure and increases blood circulation.

मंगलवार, 2 सितंबर 2014

AOK Ion Detox Foot Bath

How does it work?
The AOK Ion Foot Bath is similar to walking on the sand along the edge of the

ocean, only it is more powerful because your feet are in direct contact with the ions being made in the saltwater of the foot bath.  Water has an almost perfect balance of positive and negative ions.  Since the body is composed of about 70% water, its ability to interact with water is very high.  When you immerse your feet into the ionized water, the vibrational frequency of the water will affect
the vibrational frequency of the body due to the interaction of the magnetic and
electrical fields.  It is an exceptionally wonderful and natural healing tool. 
It is painless, with no side effects.

With an Ion Detox Foot Bath, each treatment session lasts about for 30
minutes. One treatment per week is suggested for up to four weeks. Drink plenty of water during the day before your session. 


What are the effects?
Due to poor diet and high stress, we tend to accumulate and store excessive
quantities of waste products.  During a 30-minute session, the ions enter your
body and begin to neutralize these tissue acid wastes.  As believed in
Reflexology, each foot is actually a channel, a conduit, through which your body
attempts to cleanse itself of toxic wastes and heavy metals that are building up
in many parts of your system.  During the foot bath you will actually see the
cleansing process take place as the water interacts with the sea salt and
magnetic field created by the AOK array.  This cleansing process results in the
correct frequency required for the cells to return to a healthy state, and to
release waste that has been bonded to them over the years.



Colour of the Water
Many colors and objects appear in the water during the Ion Cleanse sessions.
The following table shows what the colors in the water represent.


Color  of the Water                        Area of  the body it represents
yellow-green                                detoxifying  from the kidney, bladder, urinary tract,
                                                     female/prostate area

orange                                          detoxifying  from joints

brown                                           detoxifying  from liver, tobacco, cellular debris

black                                              detoxifying  from liver

dark  green                                   detoxifying  from gallbladder

white  foam                                  lymphatic  system

white  cheese-like particles         yeast

black  flecks                                 heavy  metals

red  flecks                                    blood  clot material


What are the healing benefits?
Here's a partial list:

  • Liver detoxification, reduce heavy metal
  • Increase in energy
  • Balance Body PH levels
  • Boost metabolism and memory
  • Enhance Immune system
  • Provide significant pain relief
  • Improve sexual health
  • Relieves Insomnia
  • Helps prevent Acne and other skin conditions
  • Liver, Kidney and Parasite cleanse
     
Precautions

The use of the Aok Ion Detox system is not recommended for:

  • people  with a Pacemaker or any other battery-operated or electrical
    implant
  • any one on heartbeat regulating medication
  • people currently undergoing radiation therapy or chemotherapy
  • pregnant women and breast-feeding mothers
  • organ transplant recipients
  • type 1 diabetics
  • persons having had an organ removed, especially the colon
  • people with open wounds on their feet
  • people taking a medication, the absence of which would mentally or
    physically incapacitate them, e.g., psychotic episodes, seizures, et
    cetera.

IMPORTANT:
users should also be aware of the following:
 

  • People  with low blood sugar should eat before treatment session.
     
  • If taking prescription medication, take med's after or at least six hours
    prior to a Aok Ion detoxification  session.
     
  • Because the Aok Cell Cleanse  is designed to eliminate toxins that the
    kidney and liver cannot eliminate on their own, as a general rule, it may be
    used by persons on dialysis or by those diagnosed with diabetes or congestive heart failure. However, people  with these conditions, or any other medical condition, should consult their physician prior to implementing the Aok Ion detoxification as part of their healing  program.
     
  • As the Aok Ion Foot bath pulls toxins from the bloodstream it may also cause valuable electrolytes (calcium, potassium, sodium, and magnesium) to be purged from the body. To replenish the body, users are strongly encouraged to take  supplements  that provide the aforementioned minerals, preferably in liquid form, as well as fatty acids and vitamin C. Some people replace  minerals  with natural food sources, concentrated foods such as vegetable juices or superfoods
    (chlorella, greens+, green phyto-power, etc).
     
  • Users should be properly hydrated prior to and after each foot bath
    session.

DISCLAIMER:
Please note that the machine does not cure
anything; it is your body that does the work. Once we have used the machine to
enable your body to re-balance its bio-energetic fields, self-detoxification is
stimulated. When the electro-magnetic fields are balanced, the body's organs
will naturally function better. The AOK program does not intend to diagnose,
treat, mitigate, prevent or cure any disease. 


See More about Detoxification


शनिवार, 30 अगस्त 2014

Vijay Sar Cup - Diabetes Cup

Description : Vijay Sar Cup
 

How to Use Herbal Wood Tumbler :

Wash the tumbler thoroughly.
Pour drinking water (Approx. 100 ml) in MadhuvijayTM Herbal Wooden Tumbler at night. After 8-10 hours the water will turn brown in color. Consume this colored water 10-15 minutes before breakfast.
Once again pour drinking water in MadhuvijayTM tumbler and consume it 10-15 minutes before dinner.
Repeat the use of MadhuvijayTM Herbal Wooden Tumbler continuously for 30 days and when the colour of water stops 

changing, scratch the inside of the glass carefully without hurting yourself and use again for 7-15 days. Use MadhuvijayTM Herbal Wooden Tumbler maximum for 45 days. Use a New Tumbler after every 45 days. Along with Madhuvijay Herbal Wooden Tumbler, we supply 12 pieces of Indian Kino herbal wood. Carry this convenience pack along with you while traveling , so that you do not miss the herbal infusion. Put 1 (one) piece of wood in the glass full of drinking water(100 ml) at night. Consume this herbal water next morning 10-15 minutes before breakfast. Again fill the glass with drinking water & consume this herbal water 10-15 minutes before dinner. One piece of herbal wood can be used for 2 (two) days. i.e. 12 pieces of herbal wood can be used for 24 days

मंगलवार, 26 अगस्त 2014

शरीर को बलवान और शक्तिशाली बनाये

शरीर को बलवान और शक्तिशाली बनाये ----------
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1. तिल : लगभग 100-100 ग्राम की मात्रा में काले तिल और ढाक के बीजों को पीसकर और इनको छानकर इसमें 200 ग्राम शक्कर मिलाकर इस मिश्रण को रोजाना 10-10 ग्राम की मात्रा में सुबह और शाम पानी के साथ लेने से शरीर में मजबूती आती है।
लगभग 20 ग्राम की मात्रा में काले तिल और इतनी ही मात्रा में गोखरू को मिलाकर बारीक पीसकर चूर्ण बना लें। इस चूर्ण को बकरी के दूध में खीर की तरह बनाकर खाने से शरीर में भरपूर ताकत का विकास होता है। इसका सेवन लगातार 15 या 20 दिनों तक करने से शरीर की कमजोरी खत्म हो जाती है।


2. छुहारा : लगभग 10 ग्राम छुहारे लेकर पीस लें। रोजाना कम से कम 2 ग्राम की मात्रा में इस छुहारे के चूर्ण को 250 मिलीलीटर हल्के गर्म दूध के साथ सोते समय लेने से शरीर मजबूत होता है। इसका सेवन केवल सर्दियों के दिनों में करना चाहिए।
4 या 5 छुहारों की गुठलियों को निकालकर इसमें लगभग लगभग आधा ग्राम गुग्गल इनके अन्दर भर दें और इन छुआरों को दूध में पकायें। सुबह और शाम को रोजाना एक छुहारा दूध के साथ खाने से वात की बीमारी दूर हो जाती है और शरीर शक्तिशाली बनता है।
लगभग 500 मिलीलीटर की मात्रा में दूध लेकर उसमें 2 छुआरे डाल दें। फिर दूध को आधा रह जाने तक गर्म करें। अब इस दूध में 2 चम्मच मिश्री या खांड़ लेकर मिलाकर पीयें और छुहारों को खा जायें। इसके खाने से शरीर में मांस बढ़ता है, शरीर की ताकत बढ़ती है और मनुष्य का वीर्य बल भी बढ़ता है। छुआरा खून बढ़ाता है, और शरीर के विभिन्न भागों में ताकत पहुंचाता है। इसका प्रयोग केवल सर्दी के दिनों में ही करना चाहिए। इसका सेवन करने के 2 घंटे तक पानी नहीं पीना चाहिए। एक बार में 4 से ज्यादा छुहारों का सेवन नहीं करना चाहिए।
किसी मिट्टी या कांच के बर्तन में पानी लेकर इसमें 2 छुहारे शाम को भिगोकर रख दें। सुबह उठकर इन छुहारों की गुठली को निकालकर इन्हें लगभग 500 मिलीलीटर दूध में गर्म करें, और 250 मिलीलीटर दूध रह जाने तक गर्म करें। अब बचे हुए दूध को पीने से शरीर की कमजोरी खत्म हो जाती है और शरीर को भरपूर ताकत मिलती है।
जो बच्चे बिस्तर पर पेशाब कर देते है उनको छुहारे का दूध पिलाने से वह बिस्तर पर पेशाब करना बन्द कर देते हैं।

3. बेर : लगभग 15 ग्राम की मात्रा में बेर के छिलकों को छाया में सुखाकर, पीपल, काली मिर्च, सौंठ और त्रिफला के साथ पीसकर इनका चूर्ण बना लें, और इसमें लगभग 75 ग्राम की मात्रा में गुग्गल को पीसकर मिला लें। इस मिश्रण को 10 ग्राम की मात्रा में सुबह के समय पानी के साथ लेने से शरीर को ताकत मिलती है और शरीर से सभी रोग दूर रहते हैं।

4. हरड़ :लगभग 100-100 ग्राम की मात्रा में हरड़ का छिलका और पिसा हुआ आंवला को लेकर इसमें 200 ग्राम की मात्रा में खांड़ मिलाकर इस चूर्ण को सुबह के समय लगभग 10 ग्राम की मात्रा में 250 मिलीलीटर हल्के गर्म दूध के साथ लेने से शरीर में मजबूती आती है।
भोजन के दौरान सुबह-शाम आधा चम्मच की मात्रा में हरड़ का चूर्ण लेते रहने से बुद्धि और शारीरिक बल में वृद्धि होती है।

5. तालमखाना : लगभग 25-25 ग्राम की मात्रा में तालमखाना, असगंध, बीजबन्द, गंगेरन, बरियार, कौंच के बीजों की गिरी, काली मूसली, सफेद मूसली और गोखरू को पीसकर तथा छानकर इस चूर्ण को लगभग 100 ग्राम देसी घी में भूनकर इसमें लगभग 100 ग्राम खांड़ या शक्कर को मिलाकर रख लें। अब इस तैयार मिश्रण में से एक चम्मच चूर्ण रोजाना सुबह के समय दूध के साथ लेने से शरीर में ताकत आती है। इस मिश्रण का प्रयोग सर्दी के दिनों में करना चाहिए।

6. जायफल : लगभग आधा ग्राम पिसा हुआ जायफल और लगभग इतनी ही बंगभस्म को शहद के साथ मिलाकर सुबह और शाम लेने से शरीर शक्तिशाली बनता है।
जायफल, मिश्री और पीपल के चूर्ण को एकसाथ मिलाकर इसमें नाग भस्म मिलाकर सेवन करने से शरीर में ताकत पैदा होती है।

7. चिलगोजा :कमजोरी आने पर चिलगोजा की मिंगी और मुनक्का को लगभग 24 घंटे तक पानी में भिगोकर रख दें। इसके बाद इसमें शक्कर मिलाकर खाने से शरीर की कमजोरी के दूर होने के साथ ही साथ शरीर में ताकत आ जाती है।
चिलगोजा खाने से व्यक्ति के शरीर में चुस्ती और फुर्ती के साथ ही साथ अधिक ताकत भी आती है।

8. नागरबेल : नागरबेल के पत्तों का शर्बत बनाकर पीने से शरीर को मजबूती मिलती है और ताकत में वृद्धि होती है।

9. बादाम : शरीर की शक्ति को बढ़ाने के लिए बादाम की गिरी और भुने हुए चनों को छीलकर रोजाना खाना चाहिए।
लगभग 4 बादाम की गिरियों को पीसकर इसमें 1-1 ग्राम की मात्रा में शहद और मिश्री को मिलाकर चाटने से मनुष्य के शरीर में ताकत बढ़ जाती है।
लगभग 7 बादाम की गिरी, 7 दाने कालीमिर्च, लगभग 3 ग्राम की मात्रा में सौंफ (गर्मियों के मौसम में सौंफ के स्थान पर सूखा हुआ साबुत धनिया) और 2 छोटी इलायची को लेकर शाम को सोते समय कांच या चीनी के बर्तन में भिगोकर रख दें। सुबह उठकर व्यायाम करने के बाद बादाम और इलायची के छिलके उतार लें और कालीमिर्च और सौंफ के साथ इनको पीस लें। इसके बाद इसको 250 मिलीलीटर पानी में मिलाकर कपड़े से छान लें। इसके बाद इसमें 2 चम्मच शहद या मिश्री मिलाकर धीरे-धीरे पीने से याददाश्त मजबूत होती है और आंखों की रोशनी तेज होने के साथ ही साथ शरीर की शक्ति बढ़ती है।
बादाम की गिरियों से निकाला गया दूध बच्चों के लिए बहुत लाभकारी होता है।
लगभग 10 बादाम की गिरियों को शाम को पानी में भिगोकर रख दें। इसके बाद सुबह इनका छिलका उतार कर बारीक पीस लें। अब इन पीसे हुए बादामों में मक्खन को मिलाकर खाने से तुतलाना और हकलाना दूर हो जाता है। इसके अलावा कमजोर शरीर भी मजबूत बनता है। इसका सेवन कुछ महीने तक करना चाहिए।
शाम को सोते समय लगभग 10 बादाम की गिरियों को पानी में भिगोकर रख दें और सुबह इनका छिलका उतारकर बारीक पीस लें। अब इन पीसे हुए बादामों को कढ़ाई में घी डालकर हल्की आग पर भूने। इसमें लाल होने से पहले ही लगभग 150 ग्राम की मात्रा में दूध डालें। इस दूध को हल्का गर्म करके पीने से शरीर शक्तिशाली बनता है। इसके अलावा शरीर का वीर्य बल भी बढ़ता है। इसका सेवन रोजाना सुबह करना चाहिए।

10. मूसली :काली मूसली के चूर्ण में मिश्री को मिलाकर खाने से शरीर की शक्ति बढ़ती है।
लगभग 10 ग्राम की मात्रा में सफेद मूसली के चूर्ण को 250 मिलीलीटर की मात्रा में दूध लेकर इसको पकायें और गाढ़ा होने तक पकने दें। अब इसको निकालकर 1 प्लेट पर रख दें और सुबह तक वह खीर की तरह उस प्लेट पर जम जायेगा। अब इसमें शक्कर मिलाकर इसको खायें। इसका सेवन 40 दिनों तक करना चाहिए। ऐसा करने से शरीर में ताकत बढ़ती है। इसका सेवन करने के दिनों में गर्म और खट्टे पदार्थों से परहेज करना चाहिए।

11. गोरखमुण्डी : गोरखमुण्डी के फूलों के चूर्ण को शहद में मिलाकर खाने से शरीर में ताकत आती है।
गोरखमुण्डी के पूरे पौधे को छाया में सुखाकर पीस लें। इसका हलवा बनाकर सेवन करने से आदमी की जवानी हमेशा के लिए बनी रहती है।
गोरखमुण्डी के बीजों को पीसकर चूर्ण की तरह बना लें। इसमें इतनी ही मात्रा में चीनी को मिलाकर चुटकी भर खाने से शरीर में ताकत बढ़ती है।
शरीर में शक्ति बढ़ाने के लिए गोरखमुण्डी की जड़ के चूर्ण को दूध के साथ 2 साल तक लेना चाहिए। इसके अलावा इसके सेवन से बाल भी कभी सफेद नहीं होते हैं।

12. लौकी (घिया) : घिया या लौकी के पत्तों का काढ़ा बनाकर रोगी को पिलाने से उसके शरीर की कमजोरी दूर होकर शरीर में ताकत बढ़ती है।
25. खिरैंटी : शरीर में कमजोरी महसूस होने पर खिरैंटी के बीजों को पकाकर खाने से शरीर में ताकत बढ़ जाती है।
खिरैंटी की जड़ की छाल को पीसकर दूध में उबालें। इसके बाद इसमें घी को मिलाकर पीने से शरीर में शक्ति बढ़ती है।

13. पोहकरमूल : पोहकरमूल का चूर्ण शहद के साथ मिलाकर खाने से शरीर शक्तिशाली बन जाता है।

14. चम्पा : शरीर की शक्ति को बढ़ाने के लिए चम्पा के फूलों का चूर्ण बनाकर शहद में मिलाकर खाना चाहिए।

15. सोनामक्खी :सोनामक्खी को गुड़ में मिलाकर खाने से शरीर की कमजोरी दूर होकर शरीर शक्तिशाली बन जाता है।
सोनामक्खी को गाय के घी या भेड़ के दूध में मिलाकर सेवन करने से शरीर की ताकत बढ़ती है।

16. गन्ना : गन्ने के रस को रोजाना पीने से शरीर में खून बढ़ता है और शरीर में ताकत आती है

17. आशकन्द : आशकन्द के चूर्ण को घी में मिलाकर खाने से घुटनों में होने वाला दर्द और घुटनों की कमजोरी दूर हो जाती है। इसका 40 दिन तक लगातार प्रयोग करें।

18. शतावर: शतावरी को पकाकर खाने या शतावरी के चूर्ण की खीर बनाकर सेवन करने से शरीर की ताकत में वृद्धि होती है।
लगभग 200 ग्राम की मात्रा में शतावरी और लगभग 200 ग्राम की ही मात्रा में ही असगंध को एकसाथ मिलाकर चूर्ण बना लें। इस चूर्ण को लगभग 6 ग्राम की मात्रा में लेकर 500 मिलीलीटर दूध में डालकर इतनी देर तक उबालें की दूध आधी मात्रा में रह जाये। अब इस बचे हुए दूध में लगभग 20 ग्राम की मात्रा में मिश्री डालकर पी जाना चाहिए। इसका सेवन 40 दिनों तक लगातार करने से शरीर शक्तिशाली बनता है।

19. इमली : इमली के बीजों को लगातार 3 दिन तक पानी में भिगोकर रख दें। इसके बाद इन बीजों को पानी में से निकालकर इनका छिलका उतारें और इसमें इमली के बीजों के जितना ही गुड़ मिलायें। अब इन दोनों को मिलाकर लगभग 6-6 ग्राम की गोलियां बना लें। सुबह और शाम इस 1-1 गोली का सेवन करने से शरीर शक्तिशाली बनता है और सभी प्रकार के रोग दूर रहते हैं।

20. सिंघाड़ा : शरीर में शक्ति बढ़ाने के लिए सिंघाड़े के आटे का हलवा बनाकर खाना चाहिए।

21. ढाक : ढाक के फूलों की कलियों का गुलकन्द बनाकर 6 ग्राम की मात्रा में दूध के साथ सेवन करने से शरीर की ताकत बढ़ती है।
लगभग 50 ग्राम की मात्रा में ढाक के बीज, लगभग 25 ग्राम की मात्रा में वायबिड़ंग और लगभग 200 ग्राम की मात्रा में गुठली वाले आंवले को एकसाथ पीसकर चूर्ण बना लें। इसके बाद रोजाना इस चूर्ण को 3 ग्राम की मात्रा में गाय के दूध के साथ लेने से शरीर की ताकत में वृद्धि होती है।
ढाक की जड़ या छाल का चूर्ण बनाकर दूध के साथ सेवन करने से संभोग करने की शक्ति में वृद्धि होती है।

22. गुड़हल : गुड़हल के सूखे पत्तों को बारीक पीसकर चूर्ण बना लें और इतनी ही मात्रा में इस चूर्ण में शक्कर मिलाकर रख दें। रोजाना लगभग 10 ग्राम की मात्रा में इस चूर्ण का सेवन करने से मनुष्य की शक्ति बढ़ जाती है। ऐसा लगभग 40 दिनों तक लगातार करना चाहिए।

23. मुलहठी : रोजाना 6 ग्राम मुलहठी के चूर्ण को 30 ग्राम दूध में घोलकर पीने से शरीर में ताकत आती है।

24. हल्दी : लगभग 500 ग्राम की मात्रा में हल्दी की गांठें और 1 किलो बुझा हुआ चूना लेकर इसको एक मिट्टी के बर्तन में डालकर इसमें ऊपर से 2 किलो पानी डालें। पानी डालते ही चूना पकने लगता है, और ठंड़ा होने पर बर्तन को ढककर रख दें। इसके बाद 2 महीने बाद हल्दी की गांठों को निकालकर पीसकर चूर्ण बना लें। हल्दी की गांठों के चूर्ण को 3 ग्राम की मात्रा में लेकर 10 ग्राम शहद के साथ मिलाकर लगातार 4 महीने तक रोजाना खाने से शरीर का खून साफ हो जाता है और शरीर में भरपूर ताकत आती है।

25. गूलर : लगभग 100 ग्राम की मात्रा में गूलर के कच्चे फलों का चूर्ण बनाकर इसमें 100 ग्राम मिश्री को मिलाकर रख दें। इस चूर्ण को लगभग 10 ग्राम की मात्रा में रोजाना दूध के साथ लेने से शरीर को भरपूर ताकत मिलती
है।

26. भांगरा : 100 ग्राम की मात्रा में भांगरा, 200 ग्राम की मात्रा में काले तिल और 200 ग्राम की मात्रा में आंवलों को एकसाथ पीसकर चूर्ण बना लें। इसके बाद इस तैयार चूर्ण में 50 ग्राम मिश्री मिला लें और इसमें घी मिलाकर बर्तन में रख दें। इस मिश्रण को 10 ग्राम की मात्रा में सुबह और शाम को गाय के दूध के साथ लेने से शरीर में ताकत आती है और इसके अलावा बाल काले रहते हैं।

27. पीपल : शाम को सोते समय छोटी पीपल को पानी में भिगोकर रख दें,
और सुबह इसको पीसकर इसमें शहद मिलाकर चाटें और ऊपर से दूध पी लें। इसको लगातार 40 दिनों तक खाना चाहिए। इससे शरीर की ताकत में वृद्धि होती है।

28. खजूर :7 या 8 पिण्डखजूरों को 500 मिलीलीटर दूध में डालकर हल्की आंच पर पका लें और लगभग 400 मिलीलीटर की मात्रा में दूध रह जाने पर दूध को आंच पर से उतार लें। अब इसमें से खजूर निकालकर खाकर ऊपर से इसी दूध को पीने से शरीर में भरपूर ताकत और मजबूती आती है।
5 या 7 खजूर लेकर इनकी गुठली को निकालकर इन खजूरों को पानी से धो लें। अब लगभग 300 मिलीलीटर की मात्रा में दूध लेकर इसमें गुठली निकले हुए खजूरों को डाल दें और दूध को हल्की आग पर 8 या 10 मिनट तक जब तक कि खजूर न गल जायें पकने दें। अब इस दूध में से खजूरों को निकाल कर चबा-चबाकर खा लें। इसके ऊपर से दूध पीने से शरीर को जबरदस्त ताकत और मजबूती मिलती है। इसके अलावा वजन बढ़ता है, कब्ज और क्षय रोग दूर होते हैं, शरीर में खून बनता है, खांसी, दमा, पेट और छाती से सम्बंधित सभी रोगों से छुटकारा मिलता है। इसका सेवन लगातार 40 दिनों तक सुबह और शाम को करना चाहिए।

29. मिश्री : लगभग 3-3 ग्राम की मात्रा में सालम मिश्री, शतावर और सफेदी मूसली को लेकर बारीक पीस लें और छान लें। अब इस चूर्ण को 400 मिलीलीटर दूध में डालकर पकायें और 300 मिलीलीटर दूध रह जाने पर इसको उतारकर इस दूध में शक्कर मिलाकर सुबह और शाम सेवन करने से आदमी के शरीर में से आलस्य दूर हो जाता है और उसको पर्याप्त मात्रा में ताकत भी मिलती है। इसका सेवन लगातार 20 दिनों तक करना चाहिए।

30. मालकांगनी : लगभग 250 ग्राम मालकांगनी को गाय के घी में भूनकर, इसमें 250 ग्राम शक्कर मिलाकर चूर्ण बना लें। अब इस चूर्ण को लगभग 6 ग्राम की मात्रा में गाय के दूध के साथ सुबह और शाम को खाने से मनुष्य के शरीर में ताकत का विकास होता है। इसका सेवन लगभग 40 दिनों तक करना चाहिए।

31. घी :लगभग 20 ग्राम घी को 30 ग्राम शहद के साथ मिलाकर भोजन करने के बाद खाने से मनुष्य की याददाश्त के साथ ही साथ उसके शरीर की ताकत भी बढ़ती है।
लगभग 250 ग्राम की मात्रा में शुद्ध देसी घी में बनी जलेबियों को लगभग 250 मिलीलीटर गाय के दूध के साथ रोजाना सुबह के समय लेने से मनुष्य की लम्बाई बढ़ती है। इसका सेवन लगातार 2 या 3 महीने तक करना चाहिए।

32. दालचीनी : दालचीनी को बारीक पीसकर इसका चूर्ण बना लें। शाम को इसके लगभग 2 ग्राम चूर्ण को 250 मिलीलीटर दूध में डालकर एक चम्मच शहद को मिलाकर पीने से शरीर की ताकत के साथ-साथ मनुष्य के वीर्य यानी धातु में भी वृद्धि होती है।

33. चना :लगभग 50 ग्राम की मात्रा में चने की दाल को लेकर 100 मिलीलीटर कच्चे दूध में भिगोकर रख दें। सुबह उठकर इस दाल में किशमिश और मिश्री मिलाकर अच्छी तरह से चबा कर खायें। इसका सेवन लगातार 40 दिनों तक करना चाहिए। इससे शरीर को ताकत मिलती है और मनुष्य का वीर्य और बल भी बढ़ता है।
रात को सोते समय थोड़े से देसी चने लेकर पानी में भिगोकर रख दें। सुबह उठकर गुड़ के साथ इन चनों को रोजाना खूब-खूब चबाकर खाने से शरीर की लम्बाई बढ़ती है। चनों की मात्रा शरीर की पाचन शक्ति के अनुसार बढ़ानी चाहिए। इन चनों को दो या तीन महीने तक खाना चाहिए।

34. विदारीकन्द : लगभग 6 ग्राम की मात्रा में विदारीकन्द के चूर्ण को लगभग 10 ग्राम गाय के घी में और लगभग 20 ग्राम शहद में मिलाकर गाय के दूध के साथ लेने से शरीर में ताकत आती है। इसका सेवन लगातार 40 दिनों तक करना चाहिए।

35. आंवला :लगभग 10 ग्राम की मात्रा में हरे आंवला को लगभग इतनी ही मात्रा में शहद में मिलाकर खाने से मनुष्य के वीर्य-बल में वृद्धि होती है। आंवलों के मौसम में इसका सेवन रोजाना सुबह के समय लगभग 1 से 2 महीने तक करना चाहिए।

शुक्रवार, 22 अगस्त 2014

मधुमेह की अचूक दवा : अनुभव करके देखें

20 वर्षों से डायबिटीज झेल रहीं 65 वर्षीय महिला जो दिन में दो बार इन्सुलिन लेने को विवश थीं, आज इस रोग से पूर्णत: मुक्त होकर सामान्य सम्पूर्ण आहार ले रही हैं । जी हाँ मिठाई भी । डाक्टरों ने उस महिला को इन्सुलिन और अन्य ब्लड सुगर कंट्रोल करने वाली दवाइयां भी बंद करने की सलाह दी है और एक ख़ास बात ।
चूंकि केवल दो सप्ताह चलने वाला यह उपचार पूर्णत: प्राकृतिक तत्वों से घर में ही निर्मित होगा, अत: इसके कोई दुष्प्रभाव होने की रत्ती भर भी संभावना नहीं है ।
मुम्बई के किडनी विशेषज्ञ डा. टोनी अलमैदा ने दृढ़ता और धैर्य के साथ इस औषधि के व्यापक प्रयोग किये हैं तथा इसे आश्चर्यजनक माना है ।
अत: आग्रह हैकि इस उपयोगी उपचार को अधिक से अधिक प्रचारित करें, जिससे अधिक से अधिक लोग लाभान्वित हो सकें ।देखिये कितना आसान है इस औषधि को घर में ही निर्मित करना ।
आवश्यक वस्तुएं -
1 – गेंहू का आटा 100 ग्राम
2 – वृक्ष से निकली गोंद 100 ग्राम
3 – जौ 100 ग्राम
4 – कलुन्जी 100 ग्राम
निर्माण विधि
उपरोक्त सभी सामग्री को 5 कप पानी में रखें । आग पर इन्हें 10 मिनिट उबालें ।
इसे स्वयं ठंडा होने दें । ठंडा होने पर इसे छानकर पानी को किसी बोतल या जग में सुरक्षित रख दें ।
> उपयोग विधि
सात दिन तक एक छोटा कप पानी प्रतिदिन सुबह खाली पेट लेना ।
अगले सप्ताह एक दिन छोड़कर इसी प्रकार सुबह खाली पेट पानी लेना । मात्र दो सप्ताह के इस प्रयोग के बाद आश्चर्यजनक रूप से आप पायेंगे कि आप सामान्य हो चुके हैं और बिना किसी समस्या के अपना नियमित सामान्य भोजन ले सकते हैं ।


गुरुवार, 21 अगस्त 2014

नुसखे

अजीर्ण
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* 7-8 मेथी के दाने और एक चम्मच राई पानी के साथ निगल जाएं तो खट्टी डकारें आना बन्द हो जाती है। यदि डकारें बंद न हों तो एक बार और ले लें।
* 5 ग्राम अजवायन का तेल, 50 ग्राम गरम जल में डालक र पी लें, तत्पश्चात् सो जायें। कुछ समय बाद जगने पर पुन: एक खुराक ले लें। यदि बदहजमी अधिक हो तो मुंह में अँगुली डालकर रोगी को वमन करायें और फिर उक्त औषध लें।

अनिद्रा (नींद न आना )
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* कुछ लोग ऐसे हैं जिन्हें गहरी नींद नहीं आती है जिसके कारण वे विशेष परेशान हैं, ऐसे में उन्हें क्षीर पाक बनाकर सेवन करना चाहिए। क्षीर पाक बनाने के लिए अश्वगंधा का बारीक चूर्ण 10 ग्राम, गाय या भैंस का दूध 250 मिलीलीटर, 250 मिलीलीटर पानी मिलाकर किसी मिट्टी के पात्र में धीमी आंच पर उबालें, जब जल उड़ जाए तो छानकर इस दूध का सेवन करें।
* सोने से पहले शहद गर्म पानी में घोलकर या दूध में शहद घोलकर पीयेें, भरपूर नींद आयेगी।

नेत्र रोग
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* बरगद की कोपलें तोडऩे से जो दूध निकलता है, वह दूध एक-एक बूँद आँखों में डालें इससे जाला, धुंधलका, लाली, जलन आदि रोग दूर होते हैं। गर्मियों में यह दूध सूर्य के निकलने से पहले ही आंखों में डालें तो विशेष लाभ होगा।
* आंख आने पर सौ ग्राम गुलाबजल में ढाई ग्राम फिटकरी डालें। इस लोशन की दो-दो बूँदें सुबह-शाम आँख में डालें तो आँखों की लाली, दर्द, चुभन, रडक़, ठीक होकर आँखों में ठण्डक पड़ जाती है।